लातूर ज़ीले की पुलिस पैरवी से: एक महीने में पांच दोषियों को सजा, तीन को 20-20 साल की जेल

 लातूर अदालत का बड़ा फैसला: यौन उत्पीड़न के 5 मामलों में मुजरिमों को कड़ी सजा

​लातूर:रफ़्तार हिंदुस्तान की

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लातूर जिला पुलिस की सख्त कार्रवाई और मजबूत अदालती पैरवी रंग लाई है। जिले की विभिन्न अदालतों ने केवल एक महीने के भीतर यौन शोषण के पांच अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाते हुए दोषियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इनमें से तीन दोषियों को 20-20 साल, एक को 10 साल और एक अन्य दोषी को 7 साल 3 महीने की बामशक्कत कैद की सजा दी गई है।

​पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे के मार्गदर्शन में पुलिस ने इन मामलों में न केवल समय पर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की, बल्कि अदालत में गवाहों की समय पर उपस्थिति और सरकारी वकीलों के साथ बेहतर तालमेल भी सुनिश्चित किया। इसके लिए बाकायदा सहायक पुलिस निरीक्षक शंकर मनाले और महिला पुलिसकर्मी बलिप्रतिपदा हिंगडे को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

​पांच मामलों में सुनाई गई सजा का विवरण:

  1. ​एमआईडीसी थाना (अपराध संख्या 74/2025): आरोपी प्रणव बालासाहेब हरबडे को पॉक्सो और बीएनएस की धाराओं के तहत विशेष न्यायाधीश एस. ए. सैयद ने 20 साल के कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। (विशेष लोक अभियोजक: मंगेश महिंद्रकर)
  2. ​एमआईडीसी थाना (अपराध संख्या 428/2026): नांदगांव निवासी आरोपी किरण अशोक कुसभांगे को दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में 20 साल की कैद और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। (विशेष लोक अभियोजक: मंगेश महिंद्रकर)
  3. ​चाकूर थाना (अपराध संख्या 50/2025): गंभीर यौन शोषण के मामले में आरोपी चंबल्या उर्फ रितेश राजनंद कसबे को अदालत ने 20 साल की जेल और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा दी। (विशेष लोक अभियोजक: मंगेश महिंद्रकर)
  4. ​वाढवणा थाना (अपराध संख्या 80/2025): आरोपी नितेश राजेश राठौड़ को उदगीर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एल. जी. पच्चे ने 10 साल के कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। (अतिरिक्त लोक अभियोजक: एडवोकेट चव्हाण)
  5. ​औराद शहाजनी थाना (अपराध संख्या 157/2017): निलंगा अतिरिक्त सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एस. बी. पवार ने आरोपी पप्पू उर्फ शिवाजी पांडुरंग सोनकांबले को 7 साल 3 महीने की कैद और 3,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। (अतिरिक्त लोक अभियोजक: के. वी. पंढरीकर)

​अपर पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण हर हफ्ते अदालती मामलों की समीक्षा करते हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि महिलाओं व बच्चों से जुड़े अपराधों में दोषियों को कड़ी सजा दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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