12 अगस्त को चर्चा की तैयारी, अल्पसंख्यक संगठनों की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली।रफ़्तार हिंदुस्तान की

विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी ने संसद से लेकर सामाजिक संगठनों तक हलचल बढ़ा दी है। Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA संशोधन विधेयक को 12 अगस्त को संसद में चर्चा के लिए लाए जाने की खबरों के बीच इसके प्रावधानों को लेकर विरोध तेज हो गया है। �
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इस बिल का असर मुख्य रूप से विदेशी फंड प्राप्त करने वाले NGO, चैरिटी, धार्मिक संस्थानों और अन्य संगठनों पर पड़ सकता है। बिल में ऐसे संगठनों के विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों को लेकर सरकार की निगरानी और कार्रवाई की शक्तियां बढ़ाने का प्रस्ताव है।
सबसे बड़ा विवाद संपत्तियों को लेकर
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द होता है, संस्था पंजीकरण वापस लेती है या उसका पंजीकरण नवीनीकृत नहीं होता, तो विदेशी योगदान से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए ‘Designated Authority’ की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी प्रावधान को लेकर आलोचकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
अल्पसंख्यक संगठनों और कुछ नागरिक समाज समूहों की चिंता है कि नए प्रावधानों का इस्तेमाल धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। दूसरी तरफ सरकार का पक्ष है कि बिल का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि धार्मिक आधार पर किसी संस्था को निशाना बनाने का प्रावधान नहीं है।
सरकार JPC को भेजने पर भी कर रही विचार
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सरकार विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने पर भी विचार कर रही है। इससे संकेत मिलता है कि बिल पर संसद में विस्तृत जांच और राजनीतिक चर्चा की संभावना बनी हुई है। �
अब नजर 12 अगस्त पर
FCRA बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होने के साथ-साथ अल्पसंख्यक एवं नागरिक समाज संगठनों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में 12 अगस्त का दिन संसद में खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिल पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ सकते हैं।
नोट: बिल अभी प्रस्तावित कानून है; अंतिम प्रावधान संसद की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।









