“चाटुकारिता से पद मिल सकते हैं, जनाधार नहीं” – एनसीपी नेता सलीम सारंग का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला
पदवीधर चुनाव नतीजों के बाद एनसीपी में घमासान: सलीम सारंग बोले— गलत नीतियां नहीं बदलीं तो सिर्फ समीक्षा ही करते रह जाएंगे
अजित पवार के नाम पर कब तक चलेगी राजनीति? चाटुकारों को पद और निष्ठावानों की अनदेखी पर भड़के सलीम सारंग
मुंबई: रफ़्तार हिंदुस्तान की

महाराष्ट्र में विधान परिषद के पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र चुनाव नतीजों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और मौलाना आजाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास निगम के निदेशक सलीम सारंग ने पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली और रणनीतियों पर तीखा हमला बोला है। सारंग ने दो टूक शब्दों में कहा कि चाटुकारिता और चमचागीरी से पार्टी में पद तो हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन जनता के बीच जनाधार नहीं बनाया जा सकता।
अजित पवार के योगदान को याद दिलाया
सलीम सारंग ने पार्टी संगठन को आईना दिखाते हुए कहा कि स्वर्गीय अजित पवार के रहते जब भी चुनाव होते थे, तो जीत के ‘मास्टर ब्लास्टर’ सिर्फ वही होते थे। लोगों को दादा के सांगठनिक ढांचे और मजबूत नेतृत्व पर अटूट विश्वास था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ अकेले दादा के नाम का सहारा लेकर अपनी राजनीतिक पारी आखिर कब तक चलाई जाएगी? अब वह समय आ चुका है जब दादा ने पार्टी को जो दिया, उससे कहीं अधिक पार्टी और कार्यकर्ताओं को वापस लौटाना होगा।
मराठवाड़ा सीट पर हार चिंता का विषय
उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में चुनाव सिर्फ किसी प्रत्याशी की व्यक्तिगत लोकप्रियता की परीक्षा नहीं होते, बल्कि यह संगठन की जमीनी ताकत और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव को भी रेखांकित करते हैं। मराठवाड़ा पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र जैसी सीट पर, जहां पार्टी लगातार तीन बार जीत दर्ज करती आई है, वहां सियासी दबदबा कमजोर होना बेहद गंभीर और आत्ममंथन का विषय है।
विचारधारा और राजनीतिक रणनीति में दूरी
छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहूजी महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए सारंग ने कहा कि सामाजिक न्याय और सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की बात सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या पार्टी की मूल विचारधारा और मौजूदा राजनीतिक रणनीति के बीच फासला बढ़ रहा है?
निष्ठावान कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग
पार्टी को दोबारा मजबूती देने के लिए सलीम सारंग ने तीन प्रमुख बिंदु सामने रखे:
जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान दिया जाए।
अनुभवी नेताओं और वरिष्ठों को काम करने का अवसर मिले।
गलत नीतियों को स्वीकार कर उनमें तत्काल सुधार किया जाए।
अंत में चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा कि यदि नेतृत्व ने अपनी गलतियों को सुधारने की तत्परता नहीं दिखाई, तो हर चुनाव के बाद पार्टी में केवल हार की समीक्षा और आत्ममंथन की रस्म अदायगी ही होती रहेगी।









