
लातूर जिले के देवणी तालुका के किसान काशीनाथ गायकवाड़ को नुकसानभरपाई के रूप में दिया गया बैल बीमार निकला। जिस सहायता से किसान को राहत मिलनी चाहिए थी, वही अब उसकी नई परेशानी बन गई है।
खेत में काम करते समय बैल की तबीयत बिगड़ गई और वह जमीन पर गिर पड़ा। अब किसान के सामने खेती का काम प्रभावित होने के साथ-साथ पशु के इलाज का अतिरिक्त बोझ भी खड़ा हो गया है।
सवाल यह है कि मुआवजे के लिए दिए जाने वाले पशुओं की स्वास्थ्य जांच होती है या नहीं? किसानों को राहत देने की योजनाओं में इतनी बड़ी लापरवाही आखिर क्यों?
किसान और ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों के नाम पर योजनाएं बनाना काफी नहीं, उनका सही और ईमानदारी से क्रियान्वयन भी जरूरी है।









