बुद्धभूमि ध्वस्तीकरण पर मुस्लिम महासंघ का आक्रोश

बुद्धभूमि ध्वस्तीकरण पर मुस्लिम महासंघ का आक्रोश, पुनर्निर्माण और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

 

 

नांदेड़,।रफ़्तार हिंदुस्तान की

 

कल्याण में बुद्धभूमि को ध्वस्त किए जाने, भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के अपमान, बौद्ध स्तूप की तोड़फोड़ और भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ की प्रतिकृति को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना पर मुस्लिम महासंघ ने कड़ा विरोध जताया है। महासंघ ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर बुद्धभूमि के पुनर्निर्माण और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मुस्लिम महासंघ के संयोजक अखिल फारुकी और अब्दुल वहीद की पहल पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश यूनुस पटेल तथा फारूक अहमद के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने यह ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि यह घटना केवल बौद्ध समाज की आस्था पर हमला नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता, बंधुत्व और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मूल्यों पर भी गंभीर आघात है। महासंघ ने कहा कि बुद्धभूमि को ध्वस्त किए जाने से बौद्ध समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है।

महासंघ ने मामले की उच्चस्तरीय और न्यायिक निगरानी में जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों और व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा शासन के खर्च पर बुद्धभूमि, स्तूप, वृक्षों और अन्य ऐतिहासिक स्मृतियों का तत्काल पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।

मुस्लिम महासंघ ने स्पष्ट किया कि अन्याय किसी भी समाज के साथ हो, उसके खिलाफ आवाज उठाना संविधान और मानवता का दायित्व है। संगठन ने बौद्ध भिक्षुओं और बौद्ध समाज के न्यायपूर्ण संघर्ष को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

निवासी उपजिलाधिकारी किरण अंबेकर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर में लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि बुद्धभूमि का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और संविधान तथा सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सभी समाजों को एकजुट होकर आगे आना होगा।

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